क्या आप भी घर में रखते हैं कैश? जमा करने से पहले पढ़ें कोर्ट का यह आदेश

हममें से कई लोग जरूरत पड़ने पर बैंक अकाउंट से पैसे निकालकर घर ले आते हैं. काम पूरा न होने पर बचे हुए पैसे वापस बैंक में जमा कर देते हैं. कभी-कभी तो निकाले गए पैसे बिना इस्तेमाल किए ही फिर से बैंक में जमा कर दिए जाते हैं. ऐसे हालात कई लोगों के साथ होते हैं. लेकिन यहां एक अहम बात जानना जरूरी है. साल 2016 में नोटबंदी के दौरान बैंक में कैश जमा करने पर आयकर विभाग से नोटिस पाने वाले हजारों टैक्सपेयर्स को राहत देने वाला एक फैसला आया है. इनकम टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल (ITAT) ने साफ किया कि सिर्फ अनुमान के आधार पर टैक्स अधिकारी किसी आम आदमी पर जुर्माना नहीं लगा सकते. फाइनेंशियल एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, आईटीओ बनाम पूर्णिमा दास केस में यह अहम फैसला सुनाया गया. मामले के अनुसार, 2016 से पहले महिला ने अपने बैंक खाते से अलग-अलग समय पर करीब 15 लाख रुपये निकाले थे. बाद में नवंबर-दिसंबर 2016 (नोटबंदी के दौरान) में वही रकम फिर से बैंक में जमा कर दी. जांच में टैक्स अधिकारी ने इन जमा पैसों को अवैध आय मान लिया. सुनवाई के दौरान महिला ने साफ कहा कि जमा की गई रकम कोई नई कमाई नहीं, बल्कि पहले निकाले गए पैसे ही थे. उन्होंने बैंक ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड भी पेश किए. इससे साबित हुआ कि यह अनडिक्लेयर्ड इनकम नहीं थी. हालांकि टैक्स अधिकारी ने इस दलील को खारिज कर दिया. उनका कहना था कि कोई भी व्यक्ति इतनी बड़ी रकम लंबे समय तक घर में बिना खर्च या निवेश किए नहीं रखता. उन्होंने ‘ह्यूमन प्रॉबेबिलिटी’ का तर्क देते हुए इसे अवैध आय माना.

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